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केसरवानी वैश्य सभा लखनऊ का 72 वां वार्षिकोत्सव एवं होली सम्मलेन

Lucknow Kesarwani Vaishya Sabha Annual Function and Holi Sammelan: केसरवानी वैश्य सभा लखनऊ का 72 वां वार्षिकोत्सव एवं होली सम्मलेन दिनांक 31 मार्च को होने जा रहा है जिसका पत्र  प्राप्त हुआ है , प्रस्तुत है उक्त पात्र का विवरण :- आदरणीय स्वजन, परमपिता परमेश्वर कि असीम अनुकम्पा से श्री केसरवानी वैश्य सभा, लखनऊ का 72 वां वार्षिकोत्सव एवं होली मिलन समारोह दिनांक 31 मार्च, 2011 को आयोजित किया जा रहा है . आपसे अनुरोध है कि बाल गोपाल एवं अतिथियों सहित अधोलिखित कार्यक्रम में भाग लेकर समारोह को सफल बनायें. हवन - प्रातः 9 बजे - स्थान - लाला हीरालाल धर्मशाला, नरही, लखनऊ सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रीतिभोज - सायं 4 बजे- स्थान - गांधी भवन प्रेक्षाग्रह, शहीद स्मारक के निकट , लखनऊ.  कृपया उक्त सन्दर्भ में निम्न सूचनाएं भी नोट कर ले :- १. समारोह स्थल पर ही वर्ष 2010-2011 के लिए सभा का सदस्यता शुल्क रुपये 15/- प्रति वयस्क कि दर से जमा कर रसीद अवश्य प्राप्त कर ले. २. सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए इच्छुक बालक -बालिकाओं से निम्न निवेदन है कि :- (क) सांस्कृतिक कार्यक्रम...

कविता: होली के रंग (Poem: holi ke rang)

होली के रंग  मेरी ख्वाहिश है होली के कुछ रंग चुराने की  होली के उन रंगों में से  जो आसमान ही नहीं  दिलों को भी रंग देतें है  मगर कुछ पलों के लिए  मैं उन रंगों से रंगूंगा  उस सुहागिन की मांग को  जो बंजर हो गए है  सूखे की तरह  मैं उन रंगों से रंगूंगा  जीवन से निराश हुए  लोगों के दिलों को  जो केवल नाउम्मीदी को पाले बैठे है  मैं उन रंगों से रंगूंगा  उन युवाओं के सपनों को  जो हताश भरी निगाहों से  हर दफ्तर में दस्तक देते है  और मैं उन रंगों से रंगूंगा  उन बूढी आँखों को  जो अपनों के ठुकराएँ है  और मौत की राह जोहते है  मेरी ख्वाहिश है होली के कुछ रंग चुराने की  लेखक : रवि प्रकाश केशरी, वाराणसी होली

केसरवानी वैश्य सभा लखनऊ का ७१ वां वार्षिकोत्सव एवं होली सम्मलेन

केसरवानी वैश्य सभा लखनऊ का ७१ वां वार्षिकोत्सव एवं होली सम्मलेन दिनांक २५ मार्च को होने जा रहा है जिसका पत्र कल  प्राप्त हुआ है , प्रस्तुत है उक्त पात्र का विवरण :- आदरणीय स्वजन, परमपिता परमेश्वर कि असीम अनुकम्पा से श्री केसरवानी वैश्य सभा, लखनऊ का ७१ वां वार्षिकोत्सव एवं होली मिलन समारोह दिनांक २५ मार्च, २०१० को आयोजित किया जा रहा है . आपसे अनुरोध है कि बाल गोपाल एवं अतिथियों सहित अधोलिखित कार्यक्रम में भाग लेकर समारोह को सफल बनायें. हवन - प्रातः ९ बजे - स्थान - लाला हीरालाल धर्मशाला, नरही, लखनऊ सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रीतिभोज - सायं ४ बजे- स्थान - गांधी भवन प्रेक्षाग्रह, शहीद स्मारक के निकट , लखनऊ.  कृपया उक्त सन्दर्भ में निम्न सूचनाएं भी नोट कर ले :- १. समारोह स्थल पर ही वर्ष २००९-२०१० के लिए सभा का सदस्यता शुल्क रुपये १५/- प्रति वयस्क कि दर से जमा कर रसीद अवश्य प्राप्त कर ले. २. सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए इच्छुक बालक -बालिकाओं से निम्न निवेदन है कि :- (क) सांस्कृतिक कार्यक्रम श्री केसरवानी महिला समिति , लखनऊ द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है. (ख) सां...

पुणे मे प्रथम केसरवानी होली मिलन कार्यक्रम संपन्न

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केसरवानी समाज के लोगों को एक सूत्र मे पिरोने मे तथा उन्हें एक दूसरे को जानने समझने मे स्थानीय स्तर पर छोटे छोटे कार्यक्रम का विशेष महत्त्व होता है। पूरे देश मे केसरवानी संगठन एवं समाज के कार्यकर्ताओं द्वारा कार्यक्रम हुआ करते है। इसी क्रम मे श्री मनोज कुमार केसरवानी ने संभवतः पहली बार पुणे शहर मे केसरवानी बंधुओं का एक होली मिलन समाहरोह दिनांक १५ मार्च २००९ को चोखी धानी विलेज, वाघोली, पुणे मे आयोजित किया जिसमे केसरवानी समाज के कई पुरूष, महिलाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस आयोजन मे केसरवानी बंधुओं ने एक दूसरे का परिचय प्राप्त किया, ऊँट की सवारी का आनंद लिया, खेल खेले, घूमर नृत्य का आनंद लिया एवं अंत मे रात्रि मे मिलजुल कर एकसाथ भोज का आनंद लिया। इस सफलपूर्वक आयोजित कार्यक्रम मे दीप्ति केशरी, प्रशांत एवं स्वेता का भी योगदान रहा। होली मिलन का सामूहिक फोटो एक दूसरे का परिचय प्राप्त करते केसरवानी सहभागी श्री मनोज कुमार केसरवानी घंटा बजाते हुए बोलिंग खेल का आनंद लेते हुए भाई ऊँट की सवारी ... वाह क्या कहने घूमर नृत्य का दृश्य एकसाथ रात्री भोज का आनंद लेते हुए पुणे ...

होली ज़रूर खेले पर रखे इसका ध्यान

"होली" मतलब मस्ती, रंग, पिचकारी, हुडदंग, गुझिया और पकवान। बस कुछ ही दिनों बाद ११ मार्च २००९ को भारत का एक प्रमुख पर्व होली मनाई जायेगी। यह एक ऐसा त्यौहार है जिसमे लोग आपस के बैर भाव भुलाकर मस्ती के एक ही रंग मे रंग जाते है। मस्ती मे झूमते रंग बिरंगे चेहरों मे घुमते नाचते गाते लोगों कि टोलियाँ, लाल पीला हरा गुलाबी हवा मे उड़ता गुलाल, और बच्चे? तो पूछिए मत! पिचकारी और रंग लिए एक दूसरे के पीछे दौड़ते भागते दिखायी देते है। होली है ही ऐसा त्यौहार जो हमे सिखाता है कि हम अमीरी गरीबी, धर्म और जाति के भेद भाव से ऊपर उठकर एक रंग मे रंग जाए। कुछ लोग तो होली का बेसब्री से इंतज़ार करते है और खूब मस्ती करते है और कुछ लोग तो रंगों के डर से घर से बाहर ही नही निकलते है। कुछ को गुलाल से होली खेलना पसंद आता है तो किसी को रंग से भरी पिचकारी से। भारत के अलग अलग प्रान्तों मे होली खेलने के अलग अलग ढंग है। ब्रज कि जहाँ लट्ठमार होली प्रसिद्ध है तो कहीं फूलों कि होली। कहीं कहीं तो सप्ताह भर तक होली खेली जाती है। पर सबका एक ही मकसद, भूल जाए सारे भेदभाव और डूब जाए मस्ती और प्रेम के रंग मे। होली मस्ती ...