Posts

Showing posts with the label बाल दिवस

बाल कविता: बचपन का देखो कैसा मज़ा

बाल दिवस अब करीब ही है । प्रत्येक वर्ष १४ नवम्बर को श्री जवाहरलाल नेहरू (चाचा नेहरू) के जन्म दिवस को बाल दिवस के रूप मे मनाया जाता है। इस उपलक्ष्य मे स्कूलों मे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होतें है. मेरा पुत्र भी प्री नर्सरी मे पढता है . बाल दिवस के उपलक्ष्य मे उसे भी स्कूल मे होने वाले कार्यक्रम मे एक सह गान मे भाग लेना है जिसकी तैयारी स्कूल व घर दोनों जगह कई दिनों से चल रही है . आजकल वह अक्सर ही मस्ती मे गाने लगता है . कविता भी बड़ी रोचक है जो बरबस ही मुझे अपने बचपन की ओर खींच ले जाती है . प्रस्तुत है वह कविता आप सभी के लिए, अपने बचपन को याद करने के लिए.... कविता : बचपन का देखो कैसा मज़ा ... २ हम दांतों मे मंजन करतें है ... हम साबुन से हाथ मुंह धोते है ... बचपन का देखो कैसा मज़ा ...2 हम बालों मे कंघी करतें है ... हम साफ़ साफ़ कपड़े पहनते है ... बचपन का देखो कैसा मज़ा ...2 हम दूध मलाई खातें है ... हम रोटी खूब चबातें है ... बचपन का देखो कैसा मज़ा ...2 हम चूहा बिल्ली खेलते है ... हम चूं चूं म्याऊँ म्याऊं करतें है ... बचपन का देखो ...

बाल दिवस पर विशेष - कब तक शोषित रहेंगे बच्चे

Image
एक दिन मैं नगर के सुप्रसिद्ध होटल में चाय पीने पहुंचा। वहां दो बच्‍चे अपने धुन में मस्त होकर काम कर रहे थे। इनमें से एक टेबिल से गिलास प्‍लेट वगैरह उठा रहा था और दूसरा , टेबिल साफ कर चाय पानी सप्‍लाई कर रहा था। इसी समय उसके हाथ से कांच का गिलास छूटकर नीचे गिर गया और टूट गया। कांच उठाते समय कांच का टुकड़ा हाथ में चुभ गया और खून बहने गला। लड़के को काटो तो खून नहीं। एक ओर मालिक द्वारा डांट खाने और नौकरी से निकाल दिये जाने का भय , तो दूसरी ओर हाथ की मरहम पट्‌टी की चिंता। मैं उस बच्‍चे के मनोभावों को पढ़ने का प्रयास कर ही रहा था , तभी मालिक का गुस्‍से भरा स्‍वर सुनाई दिया '' वहां क्‍या मुंह ताक रहा है.......गिलास उठाना और साफ करने की तमीज नहीं और चले आते हैं मुफ्‍त की रोटी तोड़ने। अरे! ओ रामू के बच्‍चे , साले ने कितने गिलास तोड़ा है , जरा गिनकर बताना तो..... ? होटल मालिक का क्रोध भरा स्‍वर सुनकर वह बालक थर-थर कांपने लगा। तभी मालिक का एक तमाचा उसके गाल पर पड़ा फिर तो शुरू हो गयी पिटाई , कभी बाल खिंचकर , तो कभी लात से। मुझसे यह दृश्‍य देखा न गया और मैं उठकर चला आया। दिन भर वह घटना प...