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भगवान् की प्रतिज्ञा

मेरा बेटा अब स्कूल जाने लगा है ... जुलाई में स्कूल खुल गए है ... अभी कल ही मै अपने बेटे के लिए स्टेशनरी खरीद कर लायी । एक कापी के पिछले प्रष्ट पर कुछ मैंने छपा हुआ पाया जो मुझे काफ़ी अच्छा लगा । मैंने सोचा क्यूँ न उसे सारी दुनिया को पढाऊँ । तो ये रहा जो कापी में छापा था ... भगवान् की प्रतिज्ञा मेरे मार्ग पर पैर रख कर तो देख , तेरे सब मार्ग न खोल दूँ तो कहना । मेरे लिए कड़वे वचन सुनकर तो देख , कृपा न बरसे तो कहना । मेरी बातें लोगों से करके तो देख , तुझे मूल्यवान न बना दूँ तो कहना । मेरे चरित्र का मनन कर के तो देख , तुझे मूल्यवान न बना दूँ तो कहना । मुझे अपना मददगार बना कर तो देख , तुझे सबकी गुलामी से न छुडा दूँ तो कहना । मेरे लिए आंसू बहा कर तो देख , तेरे जीवन में आनंद के सागर न भर दूँ तो कहना । मेरे लिए कुछ बनकर तो देख , तुझे कीमती न बना दूँ तो कहना । स्वयं को न्योछावर कर के तो देख , तुझे मशहूर न करा दूँ तो क...

केसरवानी युवा अंतरजातीय विवाह के पक्ष मै है?

सोशल नेट्वर्किंग साईट ऑरकुट मै मैंने एक Poll देखा मुझे काफ़ी हैरत हुई। प्रश्न था : Do you favor intercaste marriages? ( क्या आप अंतरजातीय विवाह के पक्ष मै है?) उत्तर के लिए दो विकल्प दिए थे । १. हाँ २. न । यह जान कर की 27 वोट में से 24 वोट अंतरजातीय विवाह के पक्ष मे थे यानि ८८ प्रतिशत केसरवानी युवा अपनी ही जाती की लड़की को विवाह के लिए उपयुक्त नही समझते, मुझे काफ़ी हैरत हुई । २०-३०% युवा ऐसा सोचते तो समझ मे आता पर 88 % ?? अब आप ही सोचिये ऐसा क्यों? कुछ वर्षों मे जैसे जैसे सूचना और संचार क्रांति आई है, वैश्वीकरण हुआ है, सबके हाँथ मे मोबाईल आया है किसी से भी संपर्क करना आसान हो गया है या तो फ़ोन के ज़रिये या फ़िर इन्टरनेट के माध्यम से। ऐसे मे मुझे लगता है आज के केसरवानी युवा खुल कर अपनी पसंद की लड़की से शादी करने के पक्ष मे हैं । अगर अपनी जाती मनपसंद लड़की मिली तो ठीक वरना अंतरजातीय विवाह मे भी उन्हें कोई बुराई नही दिखाई देती है। इस विषय पर कई प्रश्न उठ खड़े होते है जिसका जवाब केसरवानी समाज के लोगो को मिलजुल कर ढूंढ़ना होगा जैसे। आप निम्न प्रश्नों को के उत्तर ढूँढने की कोशिश ...