कविता: नारी {८ मार्च नारी दिवस विशेष}
वर्षो से जकड़ी जंजीरे तोड़ दे सरे बंधन नित आगे बढ़ने से तेरा होगा हरदम अभिनन्दन ! घर की ऊँची दीवारों में तू क्यों आंसू रोती है दिया ईश ने तुझको शक्ति फ़िर क्यो अबला बनती है ! तू सीता है तू सावित्री तू इंदिरा तू लक्ष्मीबाई तेरे चरणों में हरदम दुनिया शीश झुकाती आई ! तू शिव की शक्ति है और ईश की माया तेरे को जिसने दुत्कारा वो पीछे पछताया ! उठ जा तन जा हो तैयार जग से ले लोहा एक बार तेरे बुलंद हौसले से होगी होगी तेरी विजय हर बार ! - रवि प्रकाश केशरी वाराणसी { ९८८९६८५१६८ }