कविता: तकलीफ
बस इतनी सी तकलीफ मेरे दिल में मौजूद है मेरे दिल तोड़ने वाला शख्स का मेरे दिल में वजूद है ! अब तन्हाइयों बिना जीने से डर लगता है हर चेहरे में उसका बस बस उसका अक्स दिखताहै ! खामोश लब झुकी निगाहें इस बात का करती बयां है बिना उसके मेरे लिए क्या जमीं क्या आसमा ! -रवि प्रकाश केशरी वाराणसी