गणतंत्र दिवस 2026 और AI की नई क्रांति: क्या अब 'एजेंट्स' संभालेंगे हमारा काम?
नमस्ते दोस्तों! कल का दिन हम सभी भारतीयों के लिए बेहद खास था। 26 जनवरी, 2026—हमारा 77वां गणतंत्र दिवस। जब मैं सुबह टीवी के सामने बैठा और कर्तव्य पथ (राजपथ) पर परेड शुरू हुई, तो सीना गर्व से चौड़ा हो गया। ठंड की उस धुंध के बीच हमारे जवानों का कदम-ताल, वो अनुशासन और वो जोश देखकर रोंगटे खड़े हो गए थे। इस साल की थीम 'विकसित भारत' सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक हकीकत बनती दिख रही है। आपने भी देखा होगा कि कैसे 'ऑपरेशन सिंदूर' की झांकी ने सबका ध्यान खींचा, और आसमान में जब राफेल विमानों ने 'त्रिशूल' फॉर्मेशन बनाया, तो वो नज़ारा बस देखते ही बनता था। बिहार की झांकी, जिसमें नालंदा और आधुनिक शिक्षा के मेल को दिखाया गया, उसने भी दिल जीत लिया। लेकिन दोस्तों, जब मैं ये परेड देख रहा था, तो मेरे दिमाग में एक बात चल रही थी। हम 1950 से 2026 तक का सफर तय कर चुके हैं। हमने बैलगाड़ी से लेकर बुलेट ट्रेन और अब सेमीकंडक्टर हब बनने तक का रास्ता देखा है। और ठीक इसी समय, दुनिया में एक और क्रांति हो रही है जो उतनी ही बड़ी है, जितनी इंटरनेट की खोज थी। मैं बात कर रहा हूँ Artificial Intelligen...