बाल कविता: बचपन का देखो कैसा मज़ा

बाल दिवस अब करीब ही है । प्रत्येक वर्ष १४ नवम्बर को श्री जवाहरलाल नेहरू (चाचा नेहरू) के जन्म दिवस को बाल दिवस के रूप मे मनाया जाता है। इस उपलक्ष्य मे स्कूलों मे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होतें है. मेरा पुत्र भी प्री नर्सरी मे पढता है . बाल दिवस के उपलक्ष्य मे उसे भी स्कूल मे होने वाले कार्यक्रम मे एक सह गान मे भाग लेना है जिसकी तैयारी स्कूल व घर दोनों जगह कई दिनों से चल रही है . आजकल वह अक्सर ही मस्ती मे गाने लगता है . कविता भी बड़ी रोचक है जो बरबस ही मुझे अपने बचपन की ओर खींच ले जाती है . प्रस्तुत है वह कविता आप सभी के लिए, अपने बचपन को याद करने के लिए....
कविता :
बचपन का देखो कैसा मज़ा...

हम दांतों मे मंजन करतें है...
हम साबुन से हाथ मुंह धोते है...
बचपन का देखो कैसा मज़ा...2

हम बालों मे कंघी करतें है...
हम साफ़ साफ़ कपड़े पहनते है...
बचपन का देखो कैसा मज़ा...2

हम दूध मलाई खातें है ...
हम रोटी खूब चबातें है...
बचपन का देखो कैसा मज़ा...2

हम चूहा बिल्ली खेलते है...
हम चूं चूं म्याऊँ म्याऊं करतें है...
बचपन का देखो कैसा मज़ा...२

आपके पास भी यदि कोई कविता हों तो यहाँ पर अवश्य बाटिये ...नमस्कार
आपका विवेक

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