लगन हो तो नेत्रहीन भी आई ए एस

कहतें है हिम्मत हो तो क्या कुछ नही कर दिखाया जा सकता है। लगन , आत्मविश्वास और मेहनत से इंसान कुछ भी कर सकता है। ऐसी ही मिसाल है दिल्ली के रवि प्रकश गुप्ता जिन्होंने ने नेत्रहीन होते हुए भी वर्ष २००६ मे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की परीक्षा मे सफलता का परचम लहराया। आई ए एस की परीक्षा पास करने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नही दी जा रही थी जिसके खिलाफ वे न्यायालय गए और वहां भी उन्हें जीत हासिल हुई।

श्री रवि प्रकाश गुप्ता जी को रेटिना की रेटिना पिग्मेंतोसा नामक बिमारी हो गई थी जिसकी वजह से १९९१ से उनकी आंखों की रौशनी धीरे धीरे कम होने लगी और १९९४ तक उन्हें बिल्कुल दिखाई देना बंद हो गया। लेकिन उन्होंने नेत्रहीन होने के बावजूद हिम्मत नही हारी और लगन से पढ़ाई की और सफल हुए।

एक समाचार पत्र के साक्षात्कार मे वे कहते है की वे अपनी पत्नी रेणू से पुस्तकों की रिकॉर्डिंग कैसेट मे करवाते थे और फिर उसे सुन कर पढ़ाई करते थे। पहली बार की २००५ की परीक्षा मे वे साक्षात्कार मे नही पास हो पाए थे पर दूसरी बार २००६ मे वे सफल रहे और उन्होंने ने वो कर दिखाया जो नेत्रवालों को मुश्किल से हासिल हो पाता है। उन्होंने २००७ मे नियुक्ति न दिए जाने पर न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था और अंततः जीत उनकी हुई।

सचमुच रवि प्रकाश गुप्ता जी की यह सफलता काबिले तारीफ़ और प्रेरक है। उन्हें इस उपलब्धि के लिए ढेरों बधायी।

Comments

mark rai said…
ravi prakash gupta se mai mila hoon we kaphi energetic personality hai. aapka shukriya aapane is article ko post kiya.

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