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Name: Pratima Bani Date Of Birth: 10th April 1984 (10:00 AM) Balconagar (Korba) Horoscope: Cancer Education: B.Sc. (Clinical Nutrition) from GGU, Bilaspur M.Sc. (Food Service Management & Dietetics) From Avanishilingam University, Coimbatore Diploma in Sangeet Visharad (Vocal Classical) 6 Years course conducted by Prachin Kala Kendra, Chandigarh. Worked as a dietitian in Hyderabad and Apollo Hospital Working as senior Nutritionist in CISCO Bangalore. Physique: : 5 feet, Slim Complexion: Fair Brother: Elder: Associate Professor, Physiotherapy, Pt.JNM Medical College, Raipur, Married with Dr Geetanjali (BDS) Optometrist (Diploma in Ophthalmic Technology) Working in Titan Eye Opticals, Raipur. Father: Dr L.L. Bani, Retd Librarian from K.V. Raipur Mother: Mrs Sitara Bani, M.A., M.Ed., Working in K.V., Raipur Uncles: 5 Uncles. Gotra: Kesarwani Vaishya (Kashyap), Migrated from western U.P. Mama: Mr. Pramod Kesari, Businessman (Residence at...
डिजिटल इमरजेंसी: अगर युद्ध की वजह से इंटरनेट बंद हो जाए, तो खुद को कैसे बचाएं? ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को डरा दिया है। आज के समय में युद्ध केवल जमीन पर नहीं, बल्कि 'डिजिटल वर्ल्ड' में भी लड़ा जाता है। अगर समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट की केबल ( Subsea Cables ) काट दी जाती है, तो हम एक 'डिजिटल ब्लैकआउट' का सामना कर सकते हैं। आम आदमी के लिए यह केवल फेसबुक या इंस्टाग्राम बंद होने की बात नहीं है। इसका मतलब है बैंकिंग, UPI , ऑनलाइन ऑफिस का काम और जरूरी सेवाओं का पूरी तरह ठप हो जाना। इस स्थिति से निपटने के लिए आपको 'इंटरनेट-फर्स्ट' की जगह 'लोकल-फर्स्ट' नजरिया अपनाना होगा। अगर आप आज ही कुछ जरूरी कदम उठाते हैं, तो इंटरनेट न होने पर भी आपका जीवन और काम प्रभावित नहीं होगा। इंटरनेट की कमजोरी: क्या वास्तव में सब कुछ बंद हो जाएगा? हम सोचते हैं कि इंटरनेट बादलों (Cloud) में है, लेकिन हकीकत में यह हजारों किलोमीटर लंबी केबल्स पर टिका है जो समुद्र के नीचे बिछी हैं। लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज की जलडमरूमध्य ( Strait of Hormuz ) ऐ...
सूरज अभी पहाड़ियों के पीछे ही था, लेकिन रुद्रपुर की हवाओं में एक अजीब सी घुटन पहले ही घुल चुकी थी। देवदार के पेड़ों की वह सोंधी खुशबू, जो कभी इस छोटे से पहाड़ी कस्बे की पहचान हुआ करती थी, अब सीमेंट और कंक्रीट की उड़ती धूल में कहीं दम तोड़ चुकी थी। चौदह साल का कबीर अपनी पुरानी, सेकंड-हैंड डीएसएलआर (DSLR) कैमरे की लेंस को साफ करते हुए एक गहरी सांस लेता है। उसे तस्वीरें खींचने का शौक था, लेकिन आजकल उसके कैमरे में पहाड़ों की खूबसूरती से ज्यादा, उनके उजड़ने की तस्वीरें कैद हो रही थीं। कबीर एक साधारण, मध्यवर्गीय परिवार से था। उसके पिता, दिनेश बाबू, कभी कस्बे के इकलौते सरकारी स्कूल में एक आदर्शवादी शिक्षक हुआ करते थे। लेकिन कुछ साल पहले, स्कूल के फंड में हो रहे घोटाले के खिलाफ आवाज उठाने पर उनका तबादला एक बहुत ही दूर-दराज के इलाके में कर दिया गया। उस घटना ने दिनेश बाबू को तोड़ दिया था। अब वे बस किसी तरह अपनी नौकरी बचाकर शांति से जीवन काटना चाहते थे। कबीर ने अपने पिता की उस हार को बहुत करीब से देखा था। इसलिए, उसके अंदर एक गहरा डर बैठ गया था—कि जो सच बोलता है, दुनिया उसे कुचल देती है। कबीर का एक ही सपन...
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