Poem: Chehra- कविता: चेहरा

कविता: चेहरा 
कुछ चेहरे है खिले हुए
कुछ चेहरे है लघु उदास
हर चेहरा एक राज छुपाये
हर चेहरा बनता है हर चेहरा खास


कभी बच्चे सी चंचलता
कभी सिंह सा क्रोध लिए
गौर से देखो हर चेहरे को
जो जीवन का सन्देश लिए

पल में हँसता पल में रोता
हर चेहरा अलबेला है
दिल को देखो चेहरा छोडो
इसमें बड़ा झमेला है


-- रवि प्रकाश केशरी, वाराणसी 

Comments

Popular posts from this blog

कविता: प्रकृति

Kesarwani Matrimonial: Jyoti Kesharwani

Kesarwani Matrimonial Bride : Vibha Gupta