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श्री गणेशाय नमः


Monday, April 5, 2010

Poem: Chehra- कविता: चेहरा

कविता: चेहरा 
कुछ चेहरे है खिले हुए
कुछ चेहरे है लघु उदास
हर चेहरा एक राज छुपाये
हर चेहरा बनता है हर चेहरा खास


कभी बच्चे सी चंचलता
कभी सिंह सा क्रोध लिए
गौर से देखो हर चेहरे को
जो जीवन का सन्देश लिए

पल में हँसता पल में रोता
हर चेहरा अलबेला है
दिल को देखो चेहरा छोडो
इसमें बड़ा झमेला है


-- रवि प्रकाश केशरी, वाराणसी 

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